भारत का बड़ा आतंकी प्रहार, पाकिस्तान में छिपे 23 आतंकियों पर सरकार का शिकंजा, UAPA की सूची में हुए शामिल

Authored By: Nishant Singh

Published On: Saturday, July 4, 2026

Last Updated On: Saturday, July 4, 2026

भारत सरकार द्वारा पाकिस्तान में छिपे 23 आतंकियों पर UAPA के तहत बड़ी कार्रवाई को दर्शाती सांकेतिक तस्वीर।
भारत सरकार द्वारा पाकिस्तान में छिपे 23 आतंकियों पर UAPA के तहत बड़ी कार्रवाई को दर्शाती सांकेतिक तस्वीर।

आतंकवाद के खिलाफ भारत ने बड़ा कदम उठाते हुए 23 आतंकियों को UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया है. इनमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई नाम शामिल हैं. सरकार का यह फैसला आतंकियों के नेटवर्क पर कानूनी शिकंजा कसने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है. 

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Saturday, July 4, 2026

भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को और अधिक सख्त करते हुए बड़ा कदम उठाया है. गृह मंत्रालय ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत एक साथ 23 आतंकियों को आतंकवादी घोषित कर दिया है. इन सभी के नाम कानून की चौथी अनुसूची में क्रम संख्या 58 से 80 तक जोड़े गए हैं. इस फैसले को सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है क्योंकि इससे इन व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का दायरा और मजबूत हो जाएगा. सरकार का संदेश साफ है कि चाहे आतंकी देश के भीतर हों या सीमा पार पाकिस्तान में छिपे हों, भारत अब उनके खिलाफ हर स्तर पर कार्रवाई करने के लिए तैयार है.

ज्यादातर आतंकी पाकिस्तान और पीओके में सक्रिय

नई सूची में शामिल अधिकांश आतंकी जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े बताए गए हैं. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इनमें से कई आतंकवादी पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में रहकर भारत के खिलाफ साजिश रच रहे हैं. लंबे समय से ये संगठन सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने, घुसपैठ कराने और भारत में हिंसक घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश करते रहे हैं. सरकार का मानना है कि इन आतंकियों को आधिकारिक रूप से सूचीबद्ध करने से उनके नेटवर्क पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दबाव बढ़ेगा और उनकी गतिविधियों पर निगरानी आसान होगी.

नगरोटा और सुंजवां हमलों से जुड़े कई नाम शामिल

घोषित आतंकियों की सूची में कई ऐसे नाम भी हैं, जिनका संबंध भारत में हुए बड़े आतंकी हमलों से जोड़ा गया है. इनमें मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान और हाफिज अब्दुल शकूर जैसे नाम प्रमुख हैं. जांच एजेंसियों के अनुसार इनका संबंध 2016 के नगरोटा सेना शिविर हमले और 2022 के जम्मू के सुंजवां सुरक्षा बल शिविर पर हुए हमले से रहा है. इन हमलों में भारतीय सैनिकों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाया गया था. ऐसे आरोपित आतंकियों को UAPA सूची में शामिल करना सरकार की आतंकवाद विरोधी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है.

हाफिज सईद के करीबी सहयोगियों पर भी कार्रवाई

सरकार ने लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े अब्दुल रऊफ और हाफिज खालिद वलीद को भी आतंकवादी घोषित किया है. जांच एजेंसियों के मुताबिक ये दोनों लंबे समय से लश्कर के शीर्ष नेतृत्व के साथ जुड़े रहे हैं और संगठन की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं. माना जाता है कि ऐसे लोग आतंकी नेटवर्क को वित्तीय, रणनीतिक और संगठनात्मक सहायता उपलब्ध कराते हैं. इन पर कार्रवाई से भारत ने यह संकेत दिया है कि केवल हमलों को अंजाम देने वाले ही नहीं, बल्कि उनके पूरे तंत्र को निशाने पर लिया जाएगा.

बेंगलुरु से पाकिस्तान तक पहुंचा आतंकी नेटवर्क

इस सूची का सबसे चर्चित नाम मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ उस्ताद उर्फ जाकिर है. सरकारी अधिसूचना के अनुसार उसका स्थायी पता बेंगलुरु, कर्नाटक का है, जबकि वर्तमान में वह पाकिस्तान के रावलपिंडी में रह रहा है. जांच एजेंसियों का दावा है कि उसके संबंध लश्कर-ए-तैयबा, अल-कायदा और ISIS जैसे आतंकी संगठनों से रहे हैं. उस पर सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करने, आतंकवादी संगठनों के लिए भर्ती कराने, हथियारों का प्रशिक्षण दिलाने और आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने जैसे गंभीर आरोप हैं. यह मामला इस बात का भी संकेत देता है कि आधुनिक दौर में आतंकवाद का नेटवर्क केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल माध्यमों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है.

UAPA के तहत क्या होगा असर?

गृह मंत्रालय ने यह कार्रवाई UAPA की धारा 35 के तहत की है. इस कानून के अंतर्गत किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद उसके खिलाफ जांच, संपत्तियों पर कार्रवाई, वित्तीय गतिविधियों पर रोक और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकती हैं. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सूचना साझा करने और आतंकियों के खिलाफ सहयोग बढ़ाने में भी यह कदम मददगार साबित होता है. गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि उपलब्ध साक्ष्यों और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर इन व्यक्तियों को आतंकवाद में संलिप्त पाया गया, जिसके बाद उनके नाम चौथी अनुसूची में शामिल किए गए. यह अधिसूचना गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव द्वारा जारी की गई है.

आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस का स्पष्ट संदेश

23 आतंकियों को एक साथ आतंकवादी घोषित करने का फैसला केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति का प्रतीक भी माना जा रहा है. सरकार लगातार यह स्पष्ट कर रही है कि देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई आतंकियों और उनके समर्थकों पर दबाव बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति को भी मजबूत करती है. आने वाले समय में भी ऐसे नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई जारी रहने की संभावना जताई जा रही है.

About the Author: Nishant Singh
निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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