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महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर बढ़ी हलचल, क्या इस बार संसद में सरकार हासिल करेगी दो-तिहाई बहुमत?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, July 20, 2026
Last Updated On: Monday, July 20, 2026
संसद के मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं. बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच सरकार जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश में है. वहीं विपक्ष समर्थन से पहले कई शर्तें रख रहा है, जिससे इन महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयकों पर सभी की नजरें टिकी हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Monday, July 20, 2026
Women Reservation Bill: संसद का मॉनसून सत्र इस बार केवल सामान्य विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहने वाला है. सरकार और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने राजनीतिक एजेंडे तय कर लिए हैं. जहां एक ओर विपक्ष पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी और अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं केंद्र सरकार की नजर महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों पर टिकी हुई है. अप्रैल 2026 के विशेष सत्र में दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण ये विधेयक आगे नहीं बढ़ पाए थे, लेकिन अब बदले राजनीतिक समीकरणों ने इनकी वापसी की संभावनाओं को मजबूत कर दिया है.
अप्रैल से जुलाई तक कैसे बदला संसद का गणित?
पिछले तीन महीनों में संसद के भीतर राजनीतिक तस्वीर काफी बदल चुकी है. कई विपक्षी सांसदों ने एनडीए के प्रति समर्थन का रुख अपनाया है, जिससे सत्ता पक्ष की ताकत पहले की तुलना में बढ़ी है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के अंदर बढ़ती असहमति और दलों के बीच बदलते रिश्तों का फायदा सरकार को मिल सकता है. हालांकि सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को इसी सत्र में पेश करेगी या नहीं, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा तेज है.
सरकार के एजेंडे में कौन-कौन से विधेयक शामिल हैं?
सरकार ने मॉनसून सत्र के लिए कई महत्वपूर्ण विधेयकों की तैयारी की है. इनमें आयकर संशोधन विधेयक, सर्वोच्च न्यायालय संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक, जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक, एमएसएमई विकास संशोधन विधेयक, विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक प्रमुख हैं. फिलहाल महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक आधिकारिक सूची में शामिल नहीं हैं, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इन्हें बाद में पेश किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है.
क्या है महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का उद्देश्य?
महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें सुनिश्चित करना है. वहीं परिसीमन विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या लगभग 550 से बढ़ाकर 850 तक करने और निर्वाचन क्षेत्रों की नई सीमाएं तय करने का प्रस्ताव माना जा रहा है. सरकार का तर्क है कि भविष्य में महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए परिसीमन जरूरी होगा. दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए और सभी राज्यों के हितों की समान सुरक्षा आवश्यक है.
विपक्ष की शर्तें और दक्षिण भारत की चिंता
विपक्ष पूरी तरह एकमत नहीं दिख रहा है. कुछ दलों का कहना है कि यदि सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में समान रूप से लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि का स्पष्ट प्रावधान किया जाए तो वे समर्थन पर विचार कर सकते हैं. वहीं दक्षिण भारत के कई राजनीतिक दलों, खासकर डीएमके, ने स्पष्ट किया है कि यदि परिसीमन से दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम होता है तो वे इसका विरोध करेंगे. उनका तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को सीटों के बंटवारे में नुकसान नहीं होना चाहिए.
लोकसभा का नंबर गेम कितना अहम?
संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है. वर्तमान स्थिति में लोकसभा की 543 में से 3 सीटें रिक्त हैं, इसलिए लगभग 360 सांसदों का समर्थन जरूरी माना जा रहा है. एनडीए के पास फिलहाल करीब 293 सांसद हैं. यदि विभिन्न दलों और निर्दलीय सांसदों का संभावित समर्थन मिलता है तो यह संख्या 350 के करीब पहुंच सकती है. ऐसे में सरकार को बहुमत के लिए केवल कुछ अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की आवश्यकता रह जाएगी. यही कारण है कि सत्ता पक्ष लगातार सहयोगी दलों और कुछ विपक्षी नेताओं के साथ संवाद बनाए हुए है.
क्या इस बार बन पाएगी सहमति?
सरकार फिलहाल जल्दबाजी के बजाय राजनीतिक माहौल का आकलन कर रही है. यदि उसे पर्याप्त समर्थन मिलने का भरोसा होता है, तभी इन विधेयकों को सदन में लाने की संभावना है. दूसरी ओर विपक्ष भी अपनी रणनीति तैयार कर रहा है और कई दल संशोधन की मांग के साथ बातचीत के लिए तैयार दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में मॉनसून सत्र के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन बिल केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो सकते हैं.














