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अमेरिका से लेकर भारत तक मचे बवाल को बताया अडाणी ने निराधार, 2.45 लाख करोड़ रुपये घटा समूह का बाजार मूल्य
Authored By: सतीश झा
Published On: Thursday, November 21, 2024
Last Updated On: Thursday, November 21, 2024
अडाणी समूह ने अमेरिकी न्याय विभाग और अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग द्वारा अडाणी ग्रीन के निदेशकों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। समूह ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वे सभी कानूनों का पालन करते आए हैं।
Authored By: सतीश झा
Last Updated On: Thursday, November 21, 2024
एक दिन पहले अमेरिका से आई एक ताजा खबर के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के जिला न्यायालय में पांच-अनुसूची आपराधिक अभियोग खोला गया है। इस अभियोग में अडानी समूह (Adani Group) के अध्यक्ष गौतम अडानी सहित प्रमुख भारतीय अधिकारियों को कथित रूप से रिश्वत और धोखाधड़ी की योजना में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। रॉयटर्स ने अमेरिकी अभियोजकों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी है।
इस खबर के कारण अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई, जिससे भारतीय शेयर बाजार पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने जानकारी दी है कि अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी, सागर आर. अडानी और विनीत एस. जैन पर सिर्कोरिटीज और वायर धोखाधड़ी, प्रतिभूति धोखाधड़ी करने की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में संघीय अदालत में पांच-अनुसूची आपराधिक अभियोग खोला गया है। अभियोग में कहा गया है कि अडानी ने झूठे और भ्रामक बयानों के आधार पर अमेरिकी निवेशकों और वैश्विक वित्तीय संस्थाओं से धन जुटाने की बहु-अरब डॉलर की योजना में अहम भूमिका निभाई थी।
अभियोग में रंजीत गुप्ता और रूपेश अग्रवाल जैसे पूर्व अधिकारी, जिनकी प्रतिभूतियों का कारोबार न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में हुआ था, भी शामिल हैं। इसके अलावा सिरिल कैबनेस, सौरभ अग्रवाल और दीपक मल्होत्रा पर भी रिश्वतखोरी योजना से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका के अटॉर्नी ब्रियोन पीस ने कहा कि इन लोगों ने भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देकर अरबों डॉलर के अनुबंध हासिल करने की योजना बनाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि गौतम अडानी, सागर अडानी और विनीत जैन ने झूठे बयानों के माध्यम से अमेरिकी और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों से पूंजी जुटाई और वैश्विक वित्तीय बाजारों की अखंडता को नुकसान पहुंचाया।
एफबीआई के सहायक निदेशक प्रभारी, जेम्स डेन्ही ने भी कहा कि व्यापारिक अधिकारियों ने भारत सरकार को रिश्वत देकर अपने व्यवसायों को लाभ पहुंचाने के लिए अनुबंधों को वित्तपोषित किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अडानी और अन्य प्रतिवादियों ने सरकारी जांच में बाधा डालने की कोशिश की और रिश्वतखोरी की साजिश को छिपाने का प्रयास किया।
अभियोग में यह भी कहा गया है कि एफबीआई, न्याय विभाग (डीओजे) और प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) की जांच में बाधा डालने का आरोप भी लगाया गया है। अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने कहा कि अभियोग में लगाए गए आरोप हैं और जब तक दोष सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक प्रतिवादी निर्दोष माने जाएंगे।
गुरुवार को अडाणी समूह के प्रवक्ता ने जारी एक बयान में अमेरिकी अधिकारियों द्वारा रिश्वतखोरी के आरोपों को खारिज किया। बयान में कहा गया कि ये आरोप तथ्यों से परे और निराधार हैं। प्रवक्ता ने कहा, “समूह सभी कानूनी प्रावधानों का पूरी तरह से पालन कर रहा है।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अमेरिकी न्याय विभाग ने खुद कहा है कि आरोपों के बावजूद आरोपियों को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक वे दोषी नहीं साबित हो जाते। अडाणी समूह ने मामले में हरसंभव कानूनी सहारा लेने की बात कही है।
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी अभियोजकों ने उद्योगपति गौतम अडाणी की अडाणी समूह की कंपनी पर आरोप लगाया है कि उसने भारत में सौर बिजली अनुबंध हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को 25 करोड़ डॉलर की रिश्वत दी थी। इसके बाद, अडाणी समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई है, जिससे समूह की सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्यांकन 2.45 लाख करोड़ रुपये घट गया है।














