Aurangzeb Controversy : औरंगजेब ने भाई को मार डाला, पिता को किया कैद; पढ़िये मुगल शासक की दरिंदगी की इनसाइट स्टोरी

Aurangzeb Controversy : औरंगजेब ने भाई को मार डाला, पिता को किया कैद; पढ़िये मुगल शासक की दरिंदगी की इनसाइट स्टोरी

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Published On: Wednesday, March 19, 2025

Updated On: Wednesday, March 19, 2025

मुगल सम्राट औरंगजेब का चित्र, जिनके शासन को लेकर विवादित इतिहास है।
मुगल सम्राट औरंगजेब का चित्र, जिनके शासन को लेकर विवादित इतिहास है।

देश के हिंदी भाषी राज्यों में औरंगजेब शुरू से विवादास्पद रहे हैं. महाराष्ट्र की राजनीति में तो ये ध्रुवीकरण करने वाले व्यक्तित्व रहे हैं.

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Updated On: Wednesday, March 19, 2025

हाईलाइट

  • मुग़ल शासक औरंगजेब भारत में सबसे अधिक विवादस्पद शासकों में पहले नंबर पर हैं.
  • उन्हें सबसे क्रूर शासक माना जाता है, जिन्होंने कई मंदिरों को तोड़वाया था.
  • हालांकि इतिहासकारों में औरंगजेब की छवि को लेकर मतभेद भी हैं.
  • एक पाकिस्तानी नाटकार का तो यहां तक मानना है कि भारत-पाक विभाजन की नींव औरंगजेब काल में पड़ गई थी.

Aurangzeb Controversy : मुगल शासक औरंगजेब महाराष्ट्र में वोटों का ध्रुवीकरण करने वाला व्यक्तित्व माना जाता रहा है. इस मुगल शासक को लेकर विवाद राज्य के राजनीतिक विमर्श में अक्सर सामने आते रहते हैं. इस बार 17 मार्च को औरंगजेब के बहाने विवाद इतना बढ़ा कि नागपुर में दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प तक पहुंच गया. कुछ दक्षिणपंथी संगठन औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इस बीच सोशल मीडिया पर धर्म विशेष को लेकर अफवाह फैलाया गया. जिसके बाद हिंसा भड़क गई.

मराठा के खलनायक

मराठा आइकन छत्रपति शिवाजी महाराज के बेटे संभाजी को औरंगजेब ने ही फांसी पर चढ़वाया था. इसलिए यहां एक धर्म विशेष के लोग औरंगजेब को निर्मम खलनायक मानते हैं. इस महीने की शुरुआत में समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आज़मी को औरंगजेब को एक ‘अच्छा प्रशासक’ बताया था. इससे ताजा विवाद पैदा हो गया.
हालांकि अपने बयान के अगले दिन अबू आजमी ने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर लोगों के सामने लाया गया है. इस नए विवाद एवं नागपुर हिंसा को जानने से पहले इतिहास में औरंगजेब को किस रूप में पेश किया गया है और इतिहासकार उनके बारे में क्या कहते हैं, जानना जरूरी है.

मुग़ल के छठे शासक

औरंगजेब छठा मुगल शासक था. उन्होंने 49 वर्षों (1658-1707) तक यहां राज किया. औरंगजेब ने राजगद्दी पर बैठने के लिए अपने पिता शाहजहां को जेल में बंद कर दिया. अपने बड़े भाई दारा शिकोह पर देशद्रोह का आरोप लगाकर सूली पर चढ़ाया. एक अन्य भाई मुराद को विष देकर मरवाया। इसके अलावा परिवार के कई लोगों की हत्या कर उसने राजगद्दी हासिल की. बताया जाता है कि अन्य राज्यों को जीतने के लिए इसने बेहद क्रूर तरीके से युद्ध लड़ा. इसलिए कई भारतीय इतिहासकार औरंगजेब को क्रूर शासक मानते हैं.

इतिहासकारों के अलग-अलग राय

औरंगजेब को लेकर इतिहासकार बंटे हुए हैं. कुछ इतिहासकार इन्हें कट्टरपंथी और क्रूर शासक मानते हैं तो कुछ इन्हें राजनीतिक रूप से परिपक्व शासक मानते हैं. इतिहासकार जदुनाथ सरकार औरंगजेब को कट्टर एवं क्रूर शासक बताते हैं. उन्होंने अपनी पुस्तक ‘ए शॉर्ट हिस्ट्री ऑफ औरंगजेब’ में लिखा है कि औरंगजेब भारत को इस्लामिक राज्य बनाना चाहता था. वे यहां ‘दार-उल-इस्लाम’ की स्थापना करना चाहता था.’
इसके उदाहरण में उन्होंने भारत के कई बड़े एवं ऐतिहासिक मंदिरों को तोड़ने का आदेश दिया है. साथ ही गैर इस्लामी लोगों पर धार्मिक कार्य आदि के लिए जजिया कर लगाया. वहीँ इस्लाम को मानने वालों पर ऐसा कोई कर नहीं लगाया गया था.

नेहरू ने औरंगजेब को कट्टरपंथी कहा

देश के प्रथम प्रधानमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी औरंगजेब को कट्टर धार्मिक शासक कहा है. उन्होंने 1946 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ में लिखा है औरंगजेब धार्मिक रूप से बेहद ही कट्टर शासक रहा है. उन्होंने औरंगज़ेब को एक धर्मांध और पुरातनपंथी शख़्स बताया है.

परिपक्व राजनीतिक शासक

शिबली नोमानी जैसे इतिहासकार औरंगजेब को धार्मिक एवं कट्टरपंथी नहीं मानते. वे मानते हैं कि औरंगजेब एक राजनीतिक शासक थे. नोमानी ने अपनी पुस्तक ‘औरंगजेब आलमगीर’ में लिखा है कि ‘औरंगजेब इस्लाम के प्रति कट्टर नहीं बल्कि एक राजनेता जैसा व्यवहार करते थे.

औरंगजेब ने डाली विभाजन की नींव

पाकिस्तान के एक नाटककार है, शहीद नदीम. उन्होंने साल 2018 औरंगजेब पर लिखा है कि भारत-पाकिस्तान विभाजन की नींव अंग्रेजों ने नहीं डाली थी. उनका मानना है कि औरंगजेब ने जब अपने बड़े भाई दारा शिकोह को मौत के घाट उतार दिया था, तभी भारत और पाकिस्तान की नींव पड़ गई थी.
क्या कहते हैं, अमेरिकी इतिहासकार

ऑडरी ट्रस्चके एक अमेरिकी इतिहासकार हैं. ट्रस्चके नेवार्क के रूटजर्स विश्वविद्यालय में दक्षिण एशिया इतिहास पढ़ाती हैं. ट्रस्चके ने औरंगजेब पर एक पुस्तक लिखी हैं, ‘औरंगजेब-द मैन एंड द मिथ’. इस पुस्तक में उन्होंने लिखा है कि औरंगजेब हिन्दुओं से नफरत करते थे, इसलिए हिंदू मंदिरों को तोड़वाया, यह कथन गलत है.
वे औरंगजेब की इस छवि के पीछे अंग्रेजों का हाथ बताते हैं. उनका मानना है कि भारत में अंग्रेजी शासन के दौरान इतिहासकार ने औरंगजेब को हिंदू विरोधी बताया. इसके पीछे अंग्रेजों की एक ही रणनीति थी, फूट डालो, शासन करो’. ताकि भारत में हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच खाई बढ़ती जाए.

गुंजन शांडिल्य समसामयिक मुद्दों पर गहरी समझ और पटकथा लेखन में दक्षता के साथ 10 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। पत्रकारिता की पारंपरिक और आधुनिक शैलियों के साथ कदम मिलाकर चलने में निपुण, गुंजन ने पाठकों और दर्शकों को जोड़ने और विषयों को सहजता से समझाने में उत्कृष्टता हासिल की है। वह समसामयिक मुद्दों पर न केवल स्पष्ट और गहराई से लिखते हैं, बल्कि पटकथा लेखन में भी उनकी दक्षता ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। उनकी लेखनी में विषय की गंभीरता और प्रस्तुति की रोचकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।
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