Manipur Crisis: मणिपुर हिंसा पर नड्डा ने खड़गे को दिखाया आईना

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Published On: Saturday, November 23, 2024

Updated On: Saturday, November 23, 2024

manipur crisis

करीब डेढ़ साल से मणिपुर हिंसा की आग में झुलस रहा है। पॉलिटिकल पार्टीज उसे शांत करने के बजाय अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की मांग की तो जवाब में जेपी नड्डा ने उन्हें आईना दिखाया।

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Updated On: Saturday, November 23, 2024

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर एक बार फिर से हिंसा में सुलग रहा है। पिछले साल से जारी हिंसा में कमी आई थी। लेकिन अचानक से एक सप्ताह पहले वहां कुकी और मैतेई समुदाय के बीच हिंसा फिर से भड़क गई है। अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है। इस संघर्ष के बीच मणिपुर मामले पर राजनीति भी खूब हो रही है।

हिंसा की आग में दिल्ली से राजनीतिक रोटियां सेंकी जा रही है। दो दिन पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर वहां शांति बहाली की मांग की थी। आज भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने खड़गे को पत्र लिखकर इसकी आलोचना की। नड्डा ने खड़गे से कहा कि खून पर राजनीति करने से बचना चाहिए।

खड़गे का राष्ट्रपति को पत्र

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 19 नवंबर को राष्ट्रपति मुर्मू को मणिपुर के मसले पर पत्र लिखा था। उन्होंने अपने पत्र में मणिपुर की भाजपा सरकार के साथ केंद्र की मोदी सरकार पर आरोप लगाया। इनका कहना है कि दोनों ही सरकार मणिपुर जैसे संवेदनशील राज्य में शांति स्थापित करने में विफल रहे हैं। करीब डेढ़ साल से मणिपुर हिंसा में झुलस रहा है। वहां कोई भी व्यक्ति सुरक्षित नहीं है। इसलिए संविधान की संरक्षक होने के नाते इस मामले में आपको हस्तक्षेप करना चाहिए।

मारे गए तीन सौ से ज्यादा लोग

खड़गे ने अपने पत्र में लिखा है कि पिछले डेढ़ साल से हिंसाग्रस्त मणिपुर में 300 से ज्यादा लोग की मौत हो चुकी है। मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। उनके मुताबिक मणिपुर में एक लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए हैं। हिंसा की वजह से इन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा है। ये सभी राहत कैंपों में रहने को मजबूर हैं। ये हालात कहीं से भी अच्छा नहीं है। इसलिए आपको मणिपुर मामले में दखल देकर वहां शांति स्थापित करना चाहिए।

नड्डा का पत्र

कांग्रेस अध्यक्ष के इसी पत्र की आलोचना आज भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने किया है। नड्डा का मानना है कि कांग्रेस अध्यक्ष जानबूझकर पूर्वोत्तर के इस राज्य के मुद्दे हो जानबूझकर संवेदनशील और सनसनीखेज बनाने पर तुले है। कांग्रेस पार्टी ने झूठे दावों और असत्य घटनाओं पर राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने पर तुली है। जबकि पिछले दस सालों से न केवल मणिपुर बल्कि पूरे पूर्वोत्तर के राज्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्राथमिकता में रहा है। इसी का नतीजा है कि आज पूर्वोत्तर के राज्य, सभी क्षेत्रों (आर्थिक, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य क्षेत्र) को बड़े बदलाव हुए हैं।

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कांग्रेस पर हमला

जेपी नड्डा ने अपने पत्र में कांग्रेस अध्यक्ष को आईना भी दिखाया। उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए खड़गे को पत्र में लिखा कि 90 के दशक के शुरूआती वर्षों में आपकी पार्टी की सरकार के गलत फैसलों का नतीजा वहां के आम नागरिक और वर्तमान सरकार भुगत रही है। वर्तमान प्रदेश सरकार उस गलत निर्णय को सही करने में जुटी है। ताकि फिर कभी भविष्य में मणिपुर हिंसा की आग में न झुलसे।

नड्डा ने पत्र में लिखा कि आप की तत्कालीन सरकार ने बाहरी आतंकियों के भारत में अवैध प्रवास को वैध बनाया था। साथ ही तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम ने उनके साथ संधि भी की थी। आपकी सरकार ने गिरफ्तारी से बचकर भाग रहे उग्रवादी नेताओं का समर्थन दिया था। वही उग्रवादी संगठन मणिपुर में अशांति फैलाने की कोशिश पहले से करते आ रहे हैं। हमारी सरकार उन्हें ऐसा नहीं करने देगी।

गुंजन शांडिल्य समसामयिक मुद्दों पर गहरी समझ और पटकथा लेखन में दक्षता के साथ 10 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। पत्रकारिता की पारंपरिक और आधुनिक शैलियों के साथ कदम मिलाकर चलने में निपुण, गुंजन ने पाठकों और दर्शकों को जोड़ने और विषयों को सहजता से समझाने में उत्कृष्टता हासिल की है। वह समसामयिक मुद्दों पर न केवल स्पष्ट और गहराई से लिखते हैं, बल्कि पटकथा लेखन में भी उनकी दक्षता ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। उनकी लेखनी में विषय की गंभीरता और प्रस्तुति की रोचकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।
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