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Assembly Election Results : 5 राज्यों में सियासी संग्राम, कहीं सत्ता पर कब्जा, कहीं ताज छीना, कहा किसने मारी बाजी?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, May 5, 2026
Last Updated On: Tuesday, May 5, 2026
Assembly Election Results: पांच राज्यों के चुनाव नतीजों ने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी. बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत, असम-पुडुचेरी में सत्ता बरकरार, केरल में बदलाव और तमिलनाडु में विजय की नई एंट्री ने साफ कर दिया कि मतदाता अब हर चुनाव में नया फैसला सुनाने को तैयार है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, May 5, 2026
Assembly Election Results : देश के पांच बड़े राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों ने राजनीति का पूरा नक्शा ही बदल दिया है. कहीं जनता ने पुराने चेहरों को नकार दिया, तो कहीं उसी नेतृत्व पर दोबारा भरोसा जताया गया. इन चुनावों में सबसे बड़ा उलटफेर पश्चिम बंगाल में देखने को मिला, जबकि असम और पुडुचेरी में सत्ता कायम रही. तमिलनाडु में एक नई ताकत का उदय हुआ, तो केरल में परंपरा ने फिर से वापसी की. इन सभी राज्यों के नतीजे यह साफ संकेत देते हैं कि देश की राजनीति अब पहले से कहीं ज्यादा बदल रही है और मतदाता अब हर चुनाव में नया संदेश देने के मूड में हैं.
पश्चिम बंगाल: 15 साल का किला ढहा, नया ‘किंग’ बना बीजेपी
पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे इस बार सबसे ज्यादा चौंकाने वाले रहे. 294 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटों की जरूरत होती है, लेकिन बीजेपी ने 200 का आंकड़ा पार कर इतिहास रच दिया. पिछले 15 वर्षों से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा और वह महज 83 सीटों तक सिमट गई. यह सिर्फ एक चुनावी हार नहीं, बल्कि एक लंबे राजनीतिक युग का अंत माना जा रहा है.
ममता बनर्जी, जिन्होंने 2011 में वामपंथ के 34 साल पुराने शासन को खत्म कर सत्ता हासिल की थी, इस बार अपनी ही सीट भवानीपुर से हार गईं. यह नतीजा बताता है कि बीजेपी ने न सिर्फ संगठनात्मक स्तर पर मजबूती दिखाई, बल्कि मतदाताओं के बीच अपनी पैठ भी गहरी कर ली. बंगाल में यह जीत बीजेपी के लिए ऐतिहासिक है और इसे राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी बड़ा बदलाव माना जा रहा है.
असम: ‘डबल इंजन’ पर फिर भरोसा, तीसरी बार बीजेपी की वापसी
असम में इस बार कोई बड़ा उलटफेर देखने को नहीं मिला. यहां की 126 सीटों में से बहुमत के लिए 64 सीटों की जरूरत होती है और बीजेपी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया और जनता ने उनके कामकाज पर भरोसा जताया.
2016 में कांग्रेस के 15 साल के शासन को खत्म कर सत्ता में आई बीजेपी ने तब से अब तक अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है. इस बार के नतीजों ने यह साबित कर दिया कि विकास और ‘डबल इंजन’ सरकार का नारा असम में असरदार रहा है. यहां विपक्ष के पास मजबूत रणनीति नहीं दिखी, जिसका फायदा बीजेपी को मिला.
केरल: परंपरा की वापसी, 10 साल बाद बदली सत्ता
केरल में हर चुनाव में सरकार बदलने की परंपरा रही है, जिसे 2021 में पिनाराई विजयन ने तोड़ दिया था. लेकिन 2026 के चुनाव में जनता ने फिर से बदलाव का फैसला लिया और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को सत्ता सौंप दी. 140 सीटों वाली विधानसभा में 71 सीटों के जादुई आंकड़े को पार कर यूडीएफ ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया.
पिछले 10 सालों से सत्ता में रही एलडीएफ सरकार को इस बार हार का सामना करना पड़ा. यह नतीजा दर्शाता है कि केरल के मतदाता बदलाव को प्राथमिकता देते हैं और हर बार नई सरकार को मौका देना चाहते हैं. कांग्रेस के लिए यह जीत काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे पार्टी को दक्षिण भारत में नई ऊर्जा मिली है.
तमिलनाडु: ‘थलापति’ की एंट्री, राजनीति में नया अध्याय
तमिलनाडु की राजनीति में इस बार सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला. 234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है, लेकिन इस बार मुकाबला पारंपरिक DMK और AIADMK के बीच न होकर त्रिकोणीय हो गया. अभिनेता से नेता बने ‘थलापति’ विजय की पार्टी ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए 109 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया.
एम.के. स्टालिन, जो 2021 से मुख्यमंत्री थे, उन्हें अपनी ही सीट से हार का सामना करना पड़ा. यह नतीजा दिखाता है कि तमिलनाडु की राजनीति में दशकों से चला आ रहा द्रविड़ वर्चस्व अब चुनौती के दौर में है. विजय की पार्टी का यह प्रदर्शन बताता है कि जनता अब नए विकल्पों को भी गंभीरता से ले रही है और पारंपरिक राजनीति से बाहर निकलने को तैयार है.
पुडुचेरी: स्थिरता पर भरोसा, एनडीए ने बरकरार रखी सत्ता
पुडुचेरी में इस बार जनता ने स्थिरता को चुना. 30 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 16 सीटों की जरूरत होती है और एनडीए गठबंधन ने यह आंकड़ा पार कर अपनी सरकार बचा ली. मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया और मतदाताओं ने उनके कामकाज पर भरोसा जताया.
यह पहली बार है जब रंगास्वामी ने लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की है, जो पुडुचेरी की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है. यहां कांग्रेस-डीएमके गठबंधन को उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं मिला, जिससे एनडीए को फायदा हुआ.
नतीजों का बड़ा संदेश: बदलती राजनीति, जागरूक मतदाता
इन पांच राज्यों के चुनाव परिणाम एक बड़ा संदेश देते हैं देश का मतदाता अब पूरी तरह जागरूक हो चुका है. वह न तो किसी पार्टी को स्थायी तौर पर सत्ता में देखना चाहता है और न ही बिना काम के किसी को दोबारा मौका देना चाहता है. जहां काम दिखा, वहां सरकार दोबारा बनी, और जहां असंतोष था, वहां सत्ता बदल गई.
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में बड़े बदलाव हुए, जबकि असम और पुडुचेरी में स्थिरता देखने को मिली. केरल ने एक बार फिर अपनी परंपरा को कायम रखा. कुल मिलाकर ये चुनाव परिणाम यह बताते हैं कि भारत की राजनीति अब नए दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां हर चुनाव में जनता ही असली ‘किंगमेकर’ बनकर उभर रही है.
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