President Election: राष्ट्रपति चुनाव 2027 कितनी आसानी से जीतेगी बीजेपी? विधानसभा नतीजों ने बदल दिया पूरा गणित
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, May 14, 2026
Updated On: Thursday, May 14, 2026
President Election: 2027 के राष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी और NDA की राह विधानसभा चुनावों के नतीजों से बेहद आसान होती दिख रही है. पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और बिहार में बढ़ी ताकत ने चुनावी गणित बदल दिया है. लोकसभा में हुए नुकसान की भरपाई राज्यों में मिली जीतों ने कर दी, जिससे विपक्ष की चुनौती कमजोर पड़ती नजर आ रही है.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Thursday, May 14, 2026
President Election: 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली थी. पार्टी अकेले बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर पाई और उसकी सीटें घट गईं. विपक्ष ने इसे बीजेपी की कमजोर होती ताकत के तौर पर पेश किया. लेकिन राजनीति में हालात तेजी से बदलते हैं. 2026 के पांच बड़े विधानसभा चुनावों ने बीजेपी और NDA को नई ताकत दे दी है. पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में शानदार प्रदर्शन ने राष्ट्रपति चुनाव 2027 का पूरा गणित बदल दिया है. अब माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में लगे “राजनीतिक जख्मों” पर विधानसभा चुनावों ने “मरहम” लगाने का काम किया है.
राष्ट्रपति चुनाव का गणित क्या होता है?
भारत में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता नहीं करती. इसके लिए एक विशेष निर्वाचक मंडल बनाया जाता है. इसमें लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित सांसदों के साथ राज्यों के विधायक शामिल होते हैं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि हर वोट की ताकत समान नहीं होती. बड़े राज्यों के विधायकों के वोट की वैल्यू ज्यादा होती है. यही कारण है कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य राष्ट्रपति चुनाव में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं.
राष्ट्रपति चुनाव से जुड़ी अहम बातें
- राष्ट्रपति का चुनाव Electoral College करता है
- सांसद और विधायक दोनों वोट डालते हैं
- मनोनीत सदस्य वोट नहीं देते
- हर विधायक के वोट की वैल्यू अलग होती है
- बड़े राज्यों का असर सबसे ज्यादा होता है
लोकसभा चुनाव का नुकसान कैसे हुआ कम?
2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सीटें 303 से घटकर 240 रह गई थीं. इससे NDA की ताकत पर सवाल उठने लगे थे. राष्ट्रपति चुनाव के लिहाज से भी यह नुकसान बड़ा माना जा रहा था क्योंकि सांसदों की संख्या कम होने से वोट वैल्यू में गिरावट आई. लेकिन इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों ने पूरी तस्वीर बदल दी. बीजेपी और NDA ने कई राज्यों में शानदार प्रदर्शन कर अपनी स्थिति पहले से मजबूत कर ली. इससे राष्ट्रपति चुनाव के लिए जरूरी वोटों का गणित फिर NDA के पक्ष में जाता दिखाई देने लगा.
विधानसभा चुनावों से NDA को हुए बड़े फायदे
- कई राज्यों में विधायकों की संख्या बढ़ी
- राष्ट्रपति चुनाव में वोट वैल्यू मजबूत हुई
- विपक्ष का मनोबल कमजोर पड़ा
- NDA की राजनीतिक पकड़ मजबूत दिखाई दी
पश्चिम बंगाल क्यों बना सबसे बड़ा गेम चेंजर?
इस बार पश्चिम बंगाल चुनाव सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. बीजेपी ने राज्य में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए बड़ी संख्या में सीटें जीत लीं. पहले जहां पार्टी सीमित सीटों तक सिमटी हुई थी, वहीं अब उसने सत्ता तक पहुंच बना ली. राष्ट्रपति चुनाव में बंगाल की विधानसभा की वोट वैल्यू काफी अहम मानी जाती है. ऐसे में यहां मिली जीत ने NDA को सीधा फायदा पहुंचाया है. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक बंगाल का परिणाम राष्ट्रपति चुनाव का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है.
बंगाल से बीजेपी को क्या फायदा मिला?
- विधायकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी
- राष्ट्रपति चुनाव में वोट वैल्यू मजबूत हुई
- पूर्वी भारत में राजनीतिक पकड़ मजबूत हुई
- विपक्ष का बड़ा गढ़ कमजोर पड़ा
महाराष्ट्र और बिहार ने भी बढ़ाई ताकत
महाराष्ट्र और बिहार जैसे बड़े राज्यों में भी NDA की स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत हो चुकी है. महाराष्ट्र में गठबंधन की ताकत बढ़ी है, जबकि बिहार में NDA का दबदबा कायम रहा. इन दोनों राज्यों की विधानसभा सीटों की वोट वैल्यू राष्ट्रपति चुनाव में काफी अहम मानी जाती है. यही वजह है कि इन राज्यों के नतीजों ने NDA को निर्णायक बढ़त दिलाने का रास्ता साफ किया है.
इन राज्यों से NDA को मिला फायदा
महाराष्ट्र
- गठबंधन के विधायकों की संख्या बढ़ी
- विपक्ष कमजोर हुआ
- राष्ट्रपति चुनाव में वोट वैल्यू मजबूत हुई
बिहार
- NDA का बहुमत मजबूत हुआ
- सहयोगी दल एकजुट दिखाई दिए
- चुनावी गणित NDA के पक्ष में गया
संसद में भी मजबूत है NDA
लोकसभा में बीजेपी भले अकेले बहुमत से पीछे रह गई हो, लेकिन सहयोगी दलों के साथ NDA मजबूत स्थिति में है. राज्यसभा में भी गठबंधन की स्थिति पहले से बेहतर मानी जा रही है. अगर सभी सहयोगी दल एकजुट रहते हैं और क्रॉस वोटिंग नहीं होती, तो राष्ट्रपति चुनाव में NDA की जीत लगभग तय मानी जा रही है.
NDA की मौजूदा ताकत
- लोकसभा में मजबूत गठबंधन
- राज्यसभा में बढ़ता समर्थन
- 20 से ज्यादा राज्यों में सरकार या समर्थन
- हजारों विधायक NDA के साथ
क्या विपक्ष के पास कोई मौका है?
राजनीति में कभी भी कुछ पूरी तरह तय नहीं माना जाता. कई बार क्रॉस वोटिंग, गठबंधन टूटने या अचानक बने नए समीकरणों से चुनावी तस्वीर बदल जाती है. लेकिन मौजूदा हालात में विपक्ष काफी कमजोर नजर आ रहा है. अगर NDA एकजुट रहता है, तो उसके पास राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए जरूरी संख्या आसानी से मौजूद है. यही वजह है कि बीजेपी अब राष्ट्रपति चुनाव को अपनी राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन के तौर पर भी देख रही है.
विपक्ष के सामने चुनौतियां
- संख्या बल की कमी
- राज्यों में कमजोर प्रदर्शन
- सहयोगी दलों की कमी
- NDA की मजबूत एकजुटता
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