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बार-बार खराब हुई E20 कार तो कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला, नई गाड़ी या पूरा पैसा लौटाने का आदेश
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, July 16, 2026
Last Updated On: Thursday, July 16, 2026
रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने E20 पेट्रोल से जुड़ी शिकायत में वाहन मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया है. आयोग ने कार कंपनी को नई E20 कार देने या पूरी कीमत लौटाने का आदेश दिया. यह फैसला E20 ईंधन, वाहन कंपनियों की जिम्मेदारी और उपभोक्ता अधिकारों पर महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Thursday, July 16, 2026
देशभर में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन इसी बीच रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का एक अहम फैसला चर्चा में है. आयोग ने एक कार मालिक की शिकायत पर सुनवाई करते हुए वाहन निर्माता कंपनी और डीलर को नई E20 कार देने या पूरी कीमत वापस करने का आदेश दिया है. आयोग ने साफ कहा कि जब अधिकांश पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल ही उपलब्ध है, तब उपभोक्ता से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह दूसरा ईंधन इस्तेमाल करे. इस फैसले को E20 पेट्रोल और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है.
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
रायपुर के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रेमराज डेब्टा ने जून 2024 में मारुति ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस खरीदी थी. उन्हें बताया गया कि कार दिसंबर 2023 में बनी है, लेकिन बाद में पता चला कि उसका निर्माण जनवरी 2023 का था. शुरुआत में कार सामान्य चली, लेकिन कुछ महीनों बाद इंजन और हाइब्रिड सिस्टम से जुड़ी खराबियां सामने आने लगीं. डैशबोर्ड पर बार-बार चेतावनी संकेत आने लगे और उन्हें कई बार सर्विस सेंटर जाना पड़ा.
सर्विस सेंटर और पेट्रोल पर उठे सवाल
डीलरशिप ने दावा किया कि कार में मिलावटी पेट्रोल डाला गया था. फ्यूल टैंक खाली कर जांच की गई और अलग तरह का पदार्थ मिलने की बात कही गई. हालांकि संबंधित पेट्रोल पंप की जांच में ईंधन सही पाया गया. इसके बावजूद कार दोबारा खराब हो गई. बार-बार फ्यूल टैंक साफ किया गया, लेकिन समस्या खत्म नहीं हुई. बाद में कंपनी ने इंजन बदलने की सलाह देते हुए लगभग 5.30 लाख रुपये का खर्च बताया और इसे वारंटी से बाहर करार दिया.
कोर्ट में क्या हुई सुनवाई?
लगातार परेशान होने के बाद डॉ. प्रेमराज ने रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई. कंपनी ने आयोग के सामने कहा कि संबंधित मॉडल E20 पेट्रोल के अनुरूप है और खराबी का कारण रखरखाव या अन्य तकनीकी वजहें हो सकती हैं. साथ ही यह भी दावा किया गया कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने का कोई ठोस प्रमाण नहीं है. लेकिन आयोग ने पाया कि अधिकृत सर्विस सेंटर में कई बार मरम्मत के बावजूद वही समस्या दोहराई गई, जिससे स्पष्ट है कि वाहन की खराबी का स्थायी समाधान नहीं हुआ.
आयोग ने क्या आदेश दिए?
आयोग ने माना कि आज अधिकांश पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल ही उपलब्ध है, इसलिए उपभोक्ता को उसके इस्तेमाल के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता. आयोग ने कंपनी और डीलर को 45 दिनों के भीतर राहत देने का निर्देश दिया.
आयोग के प्रमुख आदेश
- उसी मॉडल की नई E20 कार उपलब्ध कराई जाए या
- लगभग 20.50 लाख रुपये की पूरी कीमत वापस की जाए.
- मानसिक पीड़ा के लिए 1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए.
- कानूनी खर्च के लिए 10 हजार रुपये का भुगतान किया जाए.
- तय समय में भुगतान न होने पर ब्याज भी देना होगा.
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
यह फैसला केवल एक वाहन मालिक तक सीमित नहीं है. इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि यदि किसी वाहन को E20 अनुकूल बताकर बेचा जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की होगी. साथ ही यह निर्णय उपभोक्ता अधिकारों, वाहन कंपनियों की जवाबदेही और E20 ईंधन की वास्तविक अनुकूलता पर नई बहस को भी जन्म दे सकता है. आने वाले समय में इसी तरह के मामलों में यह फैसला एक महत्वपूर्ण कानूनी आधार बन सकता है.
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