मानसून सत्र में होगा बड़ा फैसला, परिसीमन बिल पर फिर होगी परीक्षा, क्या बदल जाएगी लोकसभा की तस्वीर?

Authored By: Nishant Singh

Published On: Friday, July 17, 2026

Last Updated On: Friday, July 17, 2026

Parliament Monsoon Session 2026 में परिसीमन बिल पर चर्चा और लोकसभा सीटों में संभावित बदलाव.
Parliament Monsoon Session 2026 में परिसीमन बिल पर चर्चा और लोकसभा सीटों में संभावित बदलाव.

Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मानसून सत्र में परिसीमन बिल एक बार फिर सरकार की बड़ी परीक्षा बनेगा. अप्रैल में बहुमत से चूका यह विधेयक अब बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच पेश होगा. विपक्ष इसे रोकने की तैयारी में है, जबकि एनडीए क्षेत्रीय दलों के समर्थन से दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रहा है.

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Friday, July 17, 2026

Parliament Monsoon Session 2026: 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 यानी परिसीमन बिल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में रहेगा. अप्रैल 2026 के बजट सत्र में यह विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण पारित नहीं हो सका था. लेकिन तीन महीनों में संसद का राजनीतिक समीकरण काफी बदल गया है. विपक्षी दलों में टूट, कई सांसदों के सत्ता पक्ष में आने और कुछ क्षेत्रीय दलों के बदले रुख ने इस बार सरकार की उम्मीदें बढ़ा दी हैं. अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या इस बार बिल संसद से पास हो पाएगा.

क्या है 131वां संशोधन विधेयक?

इस विधेयक का उद्देश्य लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर लगभग 850 तक करने का संवैधानिक रास्ता तैयार करना है. साथ ही नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया पूरी करना भी इसका अहम हिस्सा है. प्रस्ताव के अनुसार राज्यों की जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा. यही वजह है कि दक्षिण भारत के तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने आशंका जताई है कि जनसंख्या नियंत्रण में सफलता के बावजूद उनका संसदीय प्रतिनिधित्व घट सकता है.

अप्रैल में क्यों गिर गया था बिल?

17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में इस विधेयक पर मतदान हुआ था. कुल 528 सांसदों ने वोट डाले, जबकि संविधान संशोधन के लिए 352 मत जरूरी थे. सरकार के पक्ष में 298 वोट मिले और विरोध में 230 वोट पड़े. सरकार 54 वोटों से पीछे रह गई. उस समय कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद पवार), समाजवादी पार्टी, आरजेडी और वाम दलों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया था.

तीन महीनों में कैसे बदल गया पूरा समीकरण?

बजट सत्र के बाद संसद का गणित तेजी से बदला है. रिपोर्टों के अनुसार 37 सांसद विपक्ष छोड़कर सत्ता पक्ष के साथ आ गए. टीएमसी के 20 सांसदों ने अलग होकर नई पार्टी बनाकर एनडीए का समर्थन किया. शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद शिंदे गुट में शामिल हो गए, जबकि आम आदमी पार्टी के सात सांसद भाजपा में चले गए. इन बदलावों के बाद एनडीए की संख्या 292 से बढ़कर 329 तक पहुंच गई. फिलहाल तीन सीटें रिक्त होने के कारण दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 माना जा रहा है. यानी सरकार अब लक्ष्य से केवल 31 वोट दूर है.

‘मिशन 360’ पर सरकार की नजर

सरकार अब उन क्षेत्रीय दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है जो पूरी तरह विरोध में नहीं हैं. डीएमके ने संकेत दिया है कि यदि सभी राज्यों में 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने जैसी गारंटी दी जाती है तो वह प्रस्ताव पर विचार कर सकता है. एनसीपी (शरद पवार) ने भी कहा है कि संशोधित बिल देखने के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा. शिवसेना (यूबीटी) ने भी संशोधनों के आधार पर पुनर्विचार की संभावना जताई है. यदि डीएमके और एनसीपी (एसपी) का समर्थन मिलता है, तो सरकार बहुमत के बेहद करीब पहुंच सकती है. बीजेडी और वाईएसआरसीपी जैसे दल भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.

विपक्ष की रणनीति क्या है?

विपक्ष का मुख्य उद्देश्य सरकार को दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचने से रोकना है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है. उनका कहना है कि संशोधित विधेयक का मसौदा सामने आए बिना कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सकता. विपक्ष चाहता है कि सरकार पहले सभी पक्षों को विश्वास में ले और राज्यों की चिंताओं का समाधान स्पष्ट करे.

मानसून सत्र का पूरा कार्यक्रम

  • 19 जुलाई: सर्वदलीय बैठक
  • 20 जुलाई: संसद का मानसून सत्र शुरू
  • 21 जुलाई: एनडीए संसदीय दल की बैठक, प्रधानमंत्री का संबोधन
  • 13 अगस्त: मानसून सत्र समाप्त

क्या इस बार पास हो पाएगा परिसीमन बिल?

इस बार की स्थिति अप्रैल के मुकाबले काफी अलग दिखाई दे रही है. एनडीए पहले से अधिक मजबूत स्थिति में है और कई क्षेत्रीय दलों के रुख में भी नरमी के संकेत मिले हैं. हालांकि अंतिम फैसला विधेयक के संशोधित स्वरूप और सरकार द्वारा राज्यों की चिंताओं को कितनी गंभीरता से संबोधित किया जाता है, इस पर निर्भर करेगा.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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