Vithabai Eetha: तमाशा की रानी से बड़े पर्दे तक, कौन थीं विठाबाई नारायणगांवकर, जिनकी कहानी दिखाएंगी श्रद्धा कपूर?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, June 25, 2026
Updated On: Thursday, June 25, 2026
Vithabai Eetha: महाराष्ट्र की प्रसिद्ध तमाशा कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर की प्रेरणादायक कहानी एक बार फिर चर्चा में है. श्रद्धा कपूर उनकी जिंदगी पर आधारित फिल्म ‘ईठा’ में नजर आएंगी. संघर्ष, समर्पण और लोककला के प्रति अटूट प्रेम से भरी विठाबाई की यात्रा आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करती है.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Thursday, June 25, 2026
Vithabai Eetha: महाराष्ट्र की लोककला और तमाशा संस्कृति का नाम आते ही जिस शख्सियत की सबसे पहले चर्चा होती है, वह हैं विठाबाई नारायणगांवकर. अपनी अद्भुत कला, दमदार मंचीय उपस्थिति और संघर्षों से भरे जीवन के कारण उन्होंने ऐसी पहचान बनाई, जो आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है. अब उनकी प्रेरणादायक कहानी बड़े पर्दे पर आने जा रही है. अभिनेत्री श्रद्धा कपूर फिल्म ‘ईठा’ में विठाबाई की भूमिका निभाती नजर आएंगी. फिल्म का टीजर सामने आने के बाद लोगों में विठाबाई के जीवन को जानने की उत्सुकता और बढ़ गई है.
लोककला के माहौल में हुआ जन्म
विठाबाई नारायणगांवकर का जन्म 1 जुलाई 1935 को महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में हुआ था. उनका परिवार वर्षों से तमाशा और लोकनृत्य से जुड़ा हुआ था. बचपन से ही उन्हें लावणी, गवलन और पारंपरिक लोककलाओं का प्रशिक्षण मिला. परिवार की तमाशा मंडली के साथ वे छोटी उम्र से ही गांव-गांव जाकर मंच पर प्रस्तुति देने लगी थीं. उनकी कला में ऐसा आकर्षण था कि दर्शक उन्हें देखने के लिए दूर-दूर से पहुंचते थे.
जब नाम ही बन गया पहचान
समय के साथ विठाबाई की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि तमाशा कार्यक्रम उनके नाम पर चलने लगे. प्रसिद्ध मराठी नाटककार मामा वारेकर ने उनके हुनर को पहचाना और उन्हें अपनी मंडली से जुड़ने का अवसर दिया. यहां से उनकी कला को नई दिशा मिली. विठाबाई की प्रस्तुति में भाव, ऊर्जा और आत्मविश्वास का ऐसा मेल था कि वे जल्द ही महाराष्ट्र की “तमाशा क्वीन” कहलाने लगीं.
एक घटना जिसने बना दिया किंवदंती
विठाबाई की जिंदगी का सबसे चर्चित प्रसंग उनकी कला के प्रति समर्पण को दर्शाता है. कहा जाता है कि गर्भावस्था के दौरान भी उन्होंने मंच पर प्रदर्शन जारी रखा. यहां तक कि बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद भी उन्होंने प्रस्तुति दी. इस घटना ने उन्हें आम कलाकार से एक जीवित किंवदंती बना दिया. लोगों ने उनके जज्बे और कला के प्रति समर्पण को सलाम किया और उनकी लोकप्रियता नई ऊंचाइयों पर पहुंच गई.
सफलता के पीछे छिपे संघर्ष
जहां मंच पर उन्हें अपार सम्मान और प्यार मिला, वहीं निजी जीवन में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. उनकी शादी मारुती सावंत से हुई थी, लेकिन वैवाहिक जीवन सुखद नहीं रहा. आर्थिक और पारिवारिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने कभी अपनी कला का साथ नहीं छोड़ा. वे लगातार मंच पर सक्रिय रहीं और तमाशा संस्कृति को नई पहचान दिलाती रहीं.
आर्थिक तंगी में बीते अंतिम दिन
इतनी लोकप्रियता हासिल करने के बावजूद जीवन के अंतिम वर्षों में विठाबाई आर्थिक संकट से जूझती रहीं. बीमारी के दौरान उनके पास इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन भी नहीं थे. 15 जनवरी 2002 को उनका निधन हो गया. हालांकि उनकी मृत्यु के बाद भी उनकी कला और योगदान को भुलाया नहीं गया. आज भी उन्हें महाराष्ट्र की लोकसंस्कृति की सबसे बड़ी कलाकारों में गिना जाता है.
अब बड़े पर्दे पर जीवंत होगी कहानी
फिल्म ‘ईठा’ के जरिए नई पीढ़ी को विठाबाई नारायणगांवकर के संघर्ष, साहस और कला के प्रति समर्पण की कहानी देखने का अवसर मिलेगा. श्रद्धा कपूर इस किरदार को निभाकर उस कलाकार को श्रद्धांजलि दे रही हैं, जिसने अपने जीवन को कला के नाम समर्पित कर दिया. यह फिल्म केवल एक जीवनी नहीं, बल्कि जुनून, संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानी भी है.
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