NEET री-एग्जाम से पहले बड़ा एक्शन, Telegram पर लगी रोक, पेपर लीक माफिया पर सरकार की सख्ती
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, June 16, 2026
Updated On: Tuesday, June 16, 2026
NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले सरकार ने फर्जी पेपर लीक दावों पर रोक लगाने के लिए Telegram पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है. NTA के अनुसार कुछ चैनल छात्रों को ठग रहे थे. 21 जून को होने वाली परीक्षा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Tuesday, June 16, 2026
NEET-UG 2026 देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं. परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. 21 जून को होने वाली NEET-UG री-एग्जाम से पहले Telegram पर अस्थायी रोक लगा दी गई है. सरकार का कहना है कि यह कदम उन फर्जी चैनलों और साइबर ठगों पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है, जो छात्रों को पेपर लीक के नाम पर गुमराह कर रहे थे.
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
पिछले कुछ समय से Telegram पर कई ऐसे चैनल सक्रिय थे, जो खुद को पेपर लीक से जुड़ा बताकर छात्रों और अभिभावकों से मोटी रकम वसूलने की कोशिश कर रहे थे. इन चैनलों के नाम भी ऐसे रखे गए थे, जिनसे छात्रों को लगे कि उनके पास परीक्षा का असली प्रश्नपत्र मौजूद है. कई जगह लाखों रुपये तक की मांग की जा रही थी. इससे परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे थे और हजारों छात्र भ्रम का शिकार हो रहे थे.
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने स्पष्ट किया है कि NEET-UG का प्रश्नपत्र पूरी तरह सुरक्षित है और परीक्षा से पहले किसी भी व्यक्ति या समूह के पास इसका एक्सेस नहीं होता. इसलिए छात्रों को ऐसे किसी भी दावे पर भरोसा नहीं करना चाहिए.
Telegram के फीचर का हो रहा था गलत इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि कुछ लोग Telegram के मैसेज एडिट फीचर का दुरुपयोग कर रहे थे. परीक्षा समाप्त होने के बाद वे पुराने संदेशों में असली प्रश्नपत्र जोड़ देते थे और फिर दावा करते थे कि पेपर पहले ही लीक हो गया था. इस तरह के फर्जी सबूत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होते थे और छात्रों में भ्रम फैलाते थे.
इसी समस्या को रोकने के लिए सरकार ने Telegram पर 22 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. साथ ही मैसेज एडिट फीचर को भी 30 जून तक बंद रखने का निर्णय लिया गया है ताकि किसी तरह की गलत जानकारी फैलाने की गुंजाइश न रहे.
कई एजेंसियां मिलकर कर रही हैं कार्रवाई
इस पूरे मामले में सिर्फ NTA ही नहीं बल्कि कई सरकारी एजेंसियां भी सक्रिय हैं. गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाला भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), विभिन्न राज्यों की पुलिस और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) मिलकर फर्जी Telegram चैनलों और बॉट्स पर कार्रवाई कर रहे हैं. कई संदिग्ध चैनलों को हटाया जा चुका है और साइबर ठगों की पहचान करने की प्रक्रिया भी जारी है.
छात्रों से क्या कहा गया है?
NTA ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह, वायरल मैसेज या पेपर लीक के दावों पर भरोसा न करें. परीक्षा से जुड़ी हर आधिकारिक जानकारी केवल NTA की वेबसाइट और उसके सत्यापित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ही उपलब्ध कराई जाएगी. एजेंसी ने कहा है कि गलत सूचनाओं से बचना और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करना ही छात्रों के हित में है.
22 लाख उम्मीदवारों की परीक्षा पर नजर
गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा को रद्द कर दिया गया था. अब 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसमें करीब 22 लाख उम्मीदवार शामिल होने वाले हैं. इतने बड़े स्तर की परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाना सरकार और NTA की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. Telegram पर लगाया गया यह अस्थायी प्रतिबंध इसी दिशा में उठाया गया एक अहम कदम माना जा रहा है.
निष्पक्ष परीक्षा के लिए सख्त संदेश
सरकार का यह फैसला साफ संकेत देता है कि परीक्षा प्रणाली के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ या अफवाह फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा को पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी और कानूनी दोनों स्तरों पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं. ऐसे में छात्रों को सिर्फ अपनी तैयारी पर ध्यान देना चाहिए और किसी भी शॉर्टकट या फर्जी दावों से दूर रहना चाहिए.
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