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Petrol Pump Scam: पेट्रोल पंप पर कैसे होती है जेब कटाई? जीरो देखने के बाद भी क्यों हो जाते हैं लोग ठगी का शिकार
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, June 9, 2026
Last Updated On: Tuesday, June 9, 2026
Petrol Pump Scam: पेट्रोल पंप पर केवल मीटर में जीरो देखना ही पर्याप्त नहीं है. कुछ मामलों में ग्राहकों का ध्यान भटकाकर कम ईंधन देने की कोशिश की जा सकती है. स्टार्ट-स्टॉप तकनीक, रीडिंग में गड़बड़ी और अन्य तरीकों से नुकसान संभव है. इसलिए ईंधन भरवाते समय पूरी प्रक्रिया पर नजर रखना बेहद जरूरी है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, June 9, 2026
Petrol Pump Scam: जब भी हम Petrol या डीजल भरवाने पेट्रोल पंप पर जाते हैं, सबसे पहले मीटर में जीरो देखते हैं. पंप कर्मचारी भी अक्सर कहते हैं, “सर, जीरो देख लीजिए.” इससे ग्राहक को भरोसा हो जाता है कि सब कुछ सही चल रहा है. लेकिन कई बार सिर्फ जीरो देखना ही पर्याप्त नहीं होता. कुछ मामलों में ग्राहक पूरी तरह सतर्क रहने के बावजूद कम ईंधन मिलने का शिकार हो सकते हैं. बढ़ती ईंधन कीमतों के दौर में यह छोटी सी लापरवाही भी जेब पर भारी पड़ सकती है.
‘स्टार्ट-स्टॉप’ तकनीक से कैसे होता है खेल?
पेट्रोल पंप पर ठगी का एक चर्चित तरीका “स्टार्ट-स्टॉप” तकनीक माना जाता है. इसमें अक्सर दो लोगों की भूमिका होती है. एक कर्मचारी ग्राहक को बातचीत या किसी अन्य सवाल में उलझाता है, जबकि दूसरा मशीन के नोजल को बार-बार दबाकर और छोड़कर पेट्रोल भरने की प्रक्रिया को बाधित करता है.
ऐसी स्थिति में मीटर पर रकम बढ़ती रहती है, लेकिन ईंधन का प्रवाह लगातार नहीं हो पाता. ग्राहक को लगता है कि निर्धारित मात्रा में पेट्रोल भर गया है, जबकि वास्तविकता में टैंक में कम ईंधन पहुंचता है. कई बार यह अंतर इतना कम होता है कि तुरंत पकड़ में नहीं आता.
बीच में रुकने वाला मीटर भी हो सकता है संकेत
मान लीजिए आपने 1000 रुपये का पेट्रोल भरवाने के लिए कहा. पेट्रोल भरते समय कर्मचारी अचानक 200 या 300 रुपये पर मशीन रोक देता है और किसी गलती का हवाला देता है. इसके बाद वह उसी रीडिंग से आगे पेट्रोल भरना शुरू कर देता है.
ऐसे समय यदि ग्राहक का ध्यान भटक जाए तो वह अंतिम रीडिंग देखकर संतुष्ट हो जाता है. लेकिन पूरी प्रक्रिया पर नजर न रखने से भ्रम पैदा हो सकता है. इसलिए हर बार यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि नई भराई शुरू होने से पहले मीटर पूरी तरह रीसेट हुआ है या नहीं.
नोजल और पाइप से जुड़ी छोटी चाल
पेट्रोल पंप की मशीनों में सुरक्षा के लिए विशेष वाल्व लगे होते हैं, लेकिन कुछ मामलों में नोजल को अचानक ऊपर उठाने या झटका देने जैसी हरकतें भी चर्चा में रहती हैं. इससे पाइप में थोड़ी मात्रा में ईंधन रह सकता है.
हालांकि यह मात्रा बहुत ज्यादा नहीं होती, लेकिन लगातार ऐसे मामलों में ग्राहकों को नुकसान हो सकता है. इसलिए ईंधन भरने के दौरान नोजल और मशीन की प्रक्रिया पर भी नजर रखना जरूरी माना जाता है.
कैसे पहचानें कि कुछ गड़बड़ है?
यदि आपको कभी लगे कि आपकी गाड़ी में अपेक्षा से कम पेट्रोल या डीजल मिला है, तो तुरंत सवाल पूछने से न हिचकें. कई लोग संकोच में शिकायत नहीं करते, जिसका फायदा गलत लोग उठा सकते हैं.
पेट्रोल पंप पर उपलब्ध प्रमाणित माप उपकरण से ईंधन की जांच करवाई जा सकती है. इससे वास्तविक मात्रा का पता लगाया जा सकता है. यदि कोई अंतर मिलता है तो ग्राहक अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है.
शिकायत कहां करें?
अगर आपको ठगी या अनियमितता का संदेह हो तो आप निम्न कदम उठा सकते हैं:
- पेट्रोल पंप प्रबंधक से तुरंत बात करें.
- प्रमाणित माप जार से ईंधन जांचने की मांग करें.
- शिकायत पुस्तिका में अपनी शिकायत दर्ज करें.
- संबंधित पेट्रोलियम कंपनी के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें.
- उपभोक्ता शिकायत पोर्टल या हेल्पलाइन का उपयोग करें.
सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
पेट्रोल पंप पर ठगी से बचने का सबसे आसान तरीका है पूरी प्रक्रिया पर ध्यान देना. केवल मीटर का जीरो देखना काफी नहीं है. ईंधन भरने की शुरुआत से लेकर अंत तक नजर बनाए रखें, जल्दबाजी न करें और किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत सवाल पूछें.
याद रखिए, आपकी कुछ मिनट की सतर्कता आपको आर्थिक नुकसान से बचा सकती है. आज के समय में जागरूक ग्राहक बनना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है.
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