Kanpur Buddha Devi Mandir: यहां प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती हैं हरी सब्जियां

Kanpur Buddha Devi Mandir: यहां प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती हैं हरी सब्जियां

Authored By: स्मिता

Published On: Thursday, April 3, 2025

Updated On: Thursday, April 3, 2025

Kanpur Buddha Devi Mandir में भक्त देवी को हरी सब्जियों का भोग चढ़ाते हुए। यह मंदिर अपनी अनोखी परंपरा और 110 साल पुराने इतिहास के लिए प्रसिद्ध है।
Kanpur Buddha Devi Mandir में भक्त देवी को हरी सब्जियों का भोग चढ़ाते हुए। यह मंदिर अपनी अनोखी परंपरा और 110 साल पुराने इतिहास के लिए प्रसिद्ध है।

Kanpur Buddha Devi Mandir: कानपुर के बुद्धा देवी मंदिर में प्रसाद के रूप में हरी सब्जियां चढ़ाई जाती हैं. इस मंदिर में कोई पुजारी भी नहीं रहते हैं. दशकों से माली परिवार बुद्धा देवी मंदिर की देख-रेख कर रहे हैं.

Authored By: स्मिता

Updated On: Thursday, April 3, 2025

Kanpur Buddha Devi Mandir : देशभर में चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2025) का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है. देश भर के देवी मंदिर में देवी दुर्गा की धूमधाम से पूजा की जाती है. सभी देवी मंदिर की अपनी विशिष्टता है. कानपुर का लगभग 110 साल प्राचीन बुद्धा देवी मंदिर भी विशेष है. इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां पर देवी के समक्ष प्रसाद के रूप में हरी सब्जियां चढ़ाई जाती हैं. मान्यता है कि हरी सब्जियां चढ़ाने से भक्तों का परिवार भी हरा-भरा रहता है. बाकी मंदिरों की तरह यहां (Kanpur Buddha Devi Mandir) की देखरेख कोई पुजारी नहीं बल्कि रघुवीर माली करते हैं.

हरी-भरी सब्जियों का भोग (Prasadam of Green Vegetables)

नवरात्र के दिनों में देवी मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है. कानपुर के बुद्धा देवी मंदिर में भी नवरात्र के अवसर पर विशेष पूजा होती है. यहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को काफी संकरे रास्ते से होकर सकरे गुजरना पड़ता है. यहां इन दिनों भक्तों की भारी भीड़ देखी जाती है. यह भीड़ नवरात्र के दिनों में कई गुना बढ़ जाती है. इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां पर आए हुए श्रद्धालु देवी को हरी-भरी सब्जियों जैसे लौकी, भिंडी, बैगन, नीबू, टमाटर आदि का भोग लगाते हैं.

क्या है मंदिर का इतिहास (Buddha Devi Mandir History)

मंदिर की देखरेख करने वाले रघुवीर माली ने बताया कि जिस जगह पर यह मंदिर बना हुआ है, सौ से भी अधिक साल पहले यहां पर सब्जियों का बगीचा हुआ करता था. इसकी देखरेख उनके पूर्वजों द्वारा की जाती थी. माली के पूर्वज बुद्धू को लगातार एक सप्ताह तक सपने में देवी मां आईं और बोली कि मुझे इस बगीचे से बाहर निकालो. बार-बार आ रहे सपने से परेशान होकर एक दिन आखिरकार उन्होंने देवी की बताई हुई जगह पर खुदाई शुरू कराई. कई दिनों तक खुदाई करने के बाद देवी की प्राप्ति हुई. इसके बाद वहीं पर उन्हें स्थापित कर उनका नाम बुद्धा देवी रख दिया गया.

हरी सब्जियां चढ़ाने की परंपरा (Prasadam of Green Vegetables)

तभी से देवी को हरी सब्जियां चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है. देवी को हरी सब्जियां चढाने की ख़ास मान्यता के कारण यहां अधिक भीड़ रहती है. प्रसाद के रूप में मिष्टान्न के साथ-साथ मंदिर में बड़ी संख्या में किसान भी देवी को हरी सब्जियों का प्रसाद चढ़ाने आते हैं. उनका मानना है कि देवी के खुश होने से उनकी फसल की पैदावार भी हरी-भरी होगी.

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स्मिता धर्म-अध्यात्म, संस्कृति-साहित्य, और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर शोधपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता में एक विशिष्ट नाम हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव समसामयिक और जटिल विषयों को सरल और नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने में उनकी दक्षता को उजागर करता है। धर्म और आध्यात्मिकता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और साहित्य के विविध पहलुओं को समझने और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में उन्होंने विशेषज्ञता हासिल की है। स्वास्थ्य, जीवनशैली, और समाज से जुड़े मुद्दों पर उनके लेख सटीक और उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं। उनकी लेखनी गहराई से शोध पर आधारित होती है और पाठकों से सहजता से जुड़ने का अनोखा कौशल रखती है।
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