Bengal SIR: बंगाल SIR में 90 लाख वोटर बाहर, EC का जिलावार डेटा जारी, चुनाव से पहले सियासी घमासान तेज
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, April 7, 2026
Last Updated On: Tuesday, April 7, 2026
Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के तहत 90 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. चुनाव आयोग ने पहली बार जिलावार डेटा जारी कर पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की है. वहीं, इस कदम को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है, क्योंकि चुनाव नजदीक हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, April 7, 2026
Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. चुनाव आयोग (ECI) ने पहली बार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत जिलेवार डेटा जारी किया है, जिसमें सामने आया कि 90 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं. यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया बताया जा रहा है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से राजनीतिक माहौल गरमा गया है. आयोग के अनुसार, 60 लाख से अधिक मामलों की जांच की गई थी, जिनमें डेटा में गड़बड़ी या संदेह के आधार पर नामों की समीक्षा की गई.
तीन चरणों में हुई बड़ी कार्रवाई
मतदाता सूची के शुद्धिकरण की यह प्रक्रिया एक दिन में नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग चरणों में पूरी हुई. सबसे पहले दिसंबर 2025 में ड्राफ्ट सूची तैयार करते समय करीब 58.2 लाख नाम हटाए गए. इसके बाद फरवरी 2026 में अंतिम सूची जारी होने तक 5.46 लाख और नाम काटे गए. तीसरे चरण में, जब न्यायिक अधिकारियों ने मामलों की गहराई से जांच की, तब 27 लाख से अधिक नाम और हटाए गए. इस तरह कुल संख्या 90.66 लाख तक पहुंच गई. यह आंकड़ा बताता है कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया.
जांच, सुधार और फिर फैसला
चुनाव आयोग ने बताया कि ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ यानी तकनीकी गड़बड़ियों के कारण 60 लाख से ज्यादा नामों को जांच के दायरे में रखा गया था. इन मामलों को ‘अंडर एडजुडिकेशन’ श्रेणी में रखा गया, जहां न्यायिक अधिकारियों ने एक-एक केस की जांच की. अब तक लगभग 59.84 लाख मामलों का निपटारा हो चुका है. जांच के बाद करीब 32.68 लाख योग्य मतदाताओं के नाम दोबारा सूची में जोड़े गए, जबकि 27.16 लाख लोगों को अपात्र मानते हुए हटा दिया गया. आयोग का कहना है कि बाकी मामलों की जांच अभी भी जारी है और पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और भरोसेमंद बनाना है.
सियासत गरम, चुनाव नजदीक
इस पूरे मामले पर राजनीति भी तेज हो गई है. विपक्षी दल, खासकर तृणमूल कांग्रेस, इसे वोटरों को बाहर करने की साजिश बता रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि इसका असर अल्पसंख्यक और सीमावर्ती क्षेत्रों में ज्यादा पड़ा है. वहीं बीजेपी और चुनाव आयोग का पक्ष है कि यह प्रक्रिया केवल मतदाता सूची को साफ और निष्पक्ष बनाने के लिए की गई है. खास बात यह है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होने वाले हैं, ऐसे में यह मुद्दा चुनावी बहस का केंद्र बन गया है. अब देखना होगा कि यह डेटा जनता के भरोसे को मजबूत करता है या सियासी विवाद को और बढ़ाता है.
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