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Saurabh Bharadwaj Slams Raghav Chadha: राघव चड्ढा पर सौरभ भारद्वाज का वार, गिनाईं बड़ी गलतियां, पार्टी एक्शन के बाद माफी की संभावना पर सवाल
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, April 3, 2026
Last Updated On: Friday, April 3, 2026
Saurabh Bharadwaj Slams Raghav Chadha: राघव चड्ढा के वीडियो के बाद सौरभ भारद्वाज ने उनकी “गलतियों” को उजागर करते हुए कहा कि उन्होंने बड़े मुद्दों पर मजबूती से आवाज नहीं उठाई. संसद में आक्रामक रुख की कमी, पार्टी लाइन से अलग चलना और अहम मामलों पर चुप्पी ही उनके खिलाफ कार्रवाई की मुख्य वजह बनी.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, April 3, 2026
Saurabh Bharadwaj Slams Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी के भीतर इन दिनों सियासी हलचल तेज हो गई है. राज्यसभा से उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने एक वीडियो जारी कर अपनी बात रखी, लेकिन इस पर पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज की प्रतिक्रिया ने पूरे मामले को और गर्म कर दिया. भारद्वाज ने सीधे-सीधे उन “गलतियों” की ओर इशारा किया, जिनकी वजह से पार्टी को यह सख्त कदम उठाना पड़ा. उनका बयान न सिर्फ व्यक्तिगत आलोचना था, बल्कि पार्टी की विचारधारा और मौजूदा राजनीति के बीच टकराव को भी उजागर करता है.
“डर गया, वो मर गया” – बेखौफ राजनीति का संदेश
सौरभ भारद्वाज ने अपने बयान में साफ कहा कि आम आदमी पार्टी की राजनीति हमेशा से बेखौफ रही है. उन्होंने याद दिलाया कि अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में पार्टी ने जनता के मुद्दों को बिना डर के उठाने की परंपरा बनाई. उनका कहना था कि आज जो भी सरकार के खिलाफ सवाल उठाता है, उसे दबाने की कोशिश की जाती है चाहे सोशल मीडिया बैन हो या फिर एफआईआर. ऐसे माहौल में “सॉफ्ट” राजनीति करने का कोई मतलब नहीं है, बल्कि खुलकर और मजबूती से सरकार से सवाल करना ही असली रास्ता है.
बड़े मुद्दों से दूरी बनी बड़ी वजह
भारद्वाज ने राघव चड्ढा पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने संसद में उन बड़े मुद्दों को उतनी मजबूती से नहीं उठाया, जिनकी देश को जरूरत थी. उनका कहना था कि जब देश में चुनावी गड़बड़ियों, वोट काटने और फर्जी वोट बनाने जैसे गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं, तब ऐसे मुद्दों पर मुखर होना जरूरी था. इसके बजाय छोटे और कम प्रभाव वाले मुद्दों पर ध्यान देना पार्टी की मूल सोच से अलग माना गया.
संसद में भूमिका पर सवाल
सौरभ भारद्वाज ने यह भी कहा कि संसद में विपक्ष का काम सिर्फ मौजूद रहना नहीं, बल्कि आक्रामक तरीके से सरकार को घेरना होता है. उन्होंने आरोप लगाया कि कई मौकों पर जब विपक्ष ने वॉकआउट किया, तब राघव चड्ढा ने उसका साथ नहीं दिया. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसा कम ही देखने को मिला जब उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री या केंद्र सरकार से तीखे सवाल किए हों.
पंजाब और कार्यकर्ताओं के मुद्दों पर चुप्पी
एक और बड़ा आरोप यह था कि राघव चड्ढा अपने ही राज्य पंजाब के मुद्दों को उठाने से भी बचते रहे. भारद्वाज ने कहा कि गुजरात में पार्टी कार्यकर्ताओं पर दर्ज हुए केस और गिरफ्तारी जैसे मामलों पर भी उनकी ओर से कोई मजबूत प्रतिक्रिया नहीं आई. पार्टी के अनुसार, यह चुप्पी उनकी सक्रियता और प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े करती है.
“आप कहां से चले थे, अब कहां आ गए”
सौरभ भारद्वाज का सबसे तीखा बयान यही था, जिसमें उन्होंने राघव चड्ढा को आत्ममंथन की सलाह दी. उन्होंने कहा कि पार्टी की शुरुआत एक आंदोलन के रूप में हुई थी, जहां हर नेता जनता के लिए लड़ने को तैयार रहता था. लेकिन अब अगर वही नेता सॉफ्ट रुख अपनाने लगें, तो यह पार्टी की आत्मा के खिलाफ है.
क्या अब भी मिल सकती है माफी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस विवाद के बाद राघव चड्ढा के लिए पार्टी में वापसी या माफी की गुंजाइश बची है? राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता. अगर वे पार्टी की लाइन पर वापस आते हैं, आक्रामक राजनीति अपनाते हैं और जनता के मुद्दों को उसी पुराने अंदाज में उठाते हैं, तो उनके लिए रास्ते खुल सकते हैं. लेकिन फिलहाल, पार्टी के भीतर जो संदेश दिया गया है, वह साफ है “लाइन से हटोगे, तो एक्शन होगा.”
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