संसद में पहली बार प्रियंका गांधी वाड्रा, केरल की मशहूर कसावु साड़ी पहनकर हाथ में संविधान लिए लिया शपथ

Authored By: सतीश झा

Published On: Thursday, November 28, 2024

waynad mp priyanka gandhi vadra
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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को केरल के वायनाड से लोकसभा सांसद के रूप में शपथ ली। इस अवसर पर उन्होंने केरल की पारंपरिक कसावु साड़ी पहनी, जो सुनहरे बॉर्डर वाली ऑफ-व्हाइट साड़ी है और मलयाली संस्कृति और उत्सवों का प्रतीक मानी जाती है।

Authored By: सतीश झा

Last Updated On: Thursday, November 28, 2024

प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) की यह पोशाक न केवल केरल की समृद्ध संस्कृति को दर्शाती है, बल्कि वायनाड के लोगों के साथ उनके गहरे जुड़ाव का भी सूक्ष्म संदेश देती है।सांसद बनने के बाद प्रियंका गांधी ने वायनाड के विकास और जनता की भलाई के लिए समर्पित रहने की बात कही। उन्होंने अपने कार्यकाल को वायनाड और पूरे केरल के लिए सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर बताया। प्रियंका गांधी का यह कदम क्षेत्रीय और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने की दिशा में एक प्रभावशाली संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

कसावु साड़ी केरल की पारंपरिक साड़ी है, जो अपनी सादगी और शालीनता के लिए जानी जाती है। इसे मुख्यतः मलयाली त्योहारों, धार्मिक आयोजनों, और पारिवारिक समारोहों में पहना जाता है।

कसावु साड़ी की विशेषताएं

यह साड़ी सामान्यतः सफेद या क्रीम रंग की होती है। इसकी खास पहचान है बॉर्डर पर सुनहरी ज़री का काम, जिसे “कसावु” कहा जाता है। कसावु साड़ी मलयाली महिलाओं की पारंपरिक पोशाक है और केरल के सांस्कृतिक उत्सव ओणम और शादी जैसे विशेष अवसरों पर पहनी जाती है। इसे शालीनता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।

इस साड़ी को हाथ से बुना जाता है और इसे बनाने में पारंपरिक करघे का उपयोग होता है। कसावु बॉर्डर पर ज़री के रूप में सोने या चांदी के धागे का उपयोग किया जाता है। कसावु साड़ी न केवल केरल में बल्कि देश-विदेश में भी प्रसिद्ध है। इसे केरल की सांस्कृतिक पहचान के रूप में देखा जाता है। आजकल कसावु साड़ी में विभिन्न डिज़ाइन और मॉडर्न टच जोड़े जा रहे हैं। इसे देशभर में फैशन के एक स्टाइलिश विकल्प के रूप में भी अपनाया गया है।

प्रियंका गांधी द्वारा लोकसभा में कसावु साड़ी पहनना इस परिधान की गरिमा और लोकप्रियता को दर्शाता है।

आहिस्ता आहिस्ता राजनीति में आती गई प्रियंका

प्रियंका गांधी वाड्रा ने 2019 में राजनीति में कदम रखा, जब उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी कांग्रेस महासचिव नियुक्त किया गया। इसके एक साल बाद, उन्हें पूरे उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई।

हालांकि कांग्रेस 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में खास प्रदर्शन नहीं कर सकी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में पार्टी को मजबूती से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। ऐसी अटकलें थीं कि प्रियंका रायबरेली से चुनाव लड़ सकती हैं, लेकिन संगठनात्मक जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया।

उनके नेतृत्व में, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन ने उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 43 पर जीत दर्ज की। इस जीत ने न केवल भाजपा के विजय रथ को रोक दिया, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि भगवा पार्टी लोकसभा में 272 सीटों के बहुमत के आंकड़े को पार न कर सके।

प्रियंका ने रायबरेली में कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जहां से राहुल गांधी ने चुनाव लड़ा। अमेठी में भी, गांधी परिवार के करीबी सहयोगी किशोरी लाल शर्मा ने भाजपा नेता और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को हराकर जीत दर्ज की।

वायनाड और रायबरेली दोनों से जीतने वाले राहुल गांधी ने अपने पारिवारिक गढ़ को बरकरार रखने का फैसला किया और वायनाड को खाली कर दिया, जिसके बाद प्रियंका गांधी वाड्रा को वहां से मैदान में उतारा गया। उन्हें 6.22 लाख वोट मिले और उन्होंने अपने निकटतम सीपीएम प्रतिद्वंद्वी सत्यन मोकेरी को चार लाख से अधिक वोटों से हराया, जो 2024 के चुनावों में राहुल गांधी को मिले वोटों से अधिक है।

About the Author: सतीश झा
सतीश झा की लेखनी में समाज की जमीनी सच्चाई और प्रगतिशील दृष्टिकोण का मेल दिखाई देता है। बीते 20 वर्षों में राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचारों के साथ-साथ राज्यों की खबरों पर व्यापक और गहन लेखन किया है। उनकी विशेषता समसामयिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना और पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाना है। राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक, उनकी गहन पकड़ और निष्पक्षता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है
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