Attention deficit hyperactivity disorder in adult: वयस्कों में एडीएचडी की पहचान कैसे की जा सकती है

Attention deficit hyperactivity disorder in adult: वयस्कों में एडीएचडी की पहचान कैसे की जा सकती है

Authored By: स्मिता

Published On: Monday, March 24, 2025

Updated On: Monday, March 24, 2025

Attention deficit hyperactivity disorder in adult: आमतौर पर अटेंशन-डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर या एडीएचडी बच्चों में देखा जाता है. इन दिनों ऐसे मामले भी खूब बढ़ रहे हैं, जिनमें बड़े भी इस डिसऑर्डर के शिकार देखे जा रहे हैं. जानते हैं क्यों होते हैं वयस्क एडीएचडी के शिकार? कैसे ऐसे पीड़ित लोग रोजमर्रा के जीवन को आसान बनाते हैं.

Authored By: स्मिता

Updated On: Monday, March 24, 2025

Attention deficit hyperactivity disorder in adult: अभिनेत्री आलिया भट्ट, अभिनेता फहाद फासिल और न जाने कितने लोकप्रिय और आम आदमी इन दिनों अटेंशन-डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर या एडीएचडी के शिकार होने के मामले देखे जा रहे हैं. अभी तक तो हम यह जानते आये थे कि यह विकार बच्चों में पाया जाता है. पर हाल में वयस्कों में इस रोग के मामले बढ़े हैं, जिसके कारण बच्चों के साथ-साथ वयस्कों को भी एडीएचडी के प्रति जागरूक होना चाहिए. जानकारी के अभाव में एडल्ट एज में यह पता ही नहीं चल पाता है कि वे इसके शिकार हैं. सीनियर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और अनन्या चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर से जुड़ी डॉ. ईशा सिंह के अनुसार, बच्चों के साथ-साथ बड़ों के लिए भी रोग का प्रारंभिक निदान (Attention deficit hyperactivity disorder in adult) जरूरी है.

क्या है अटेंशन-डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (What is Attention deficit hyperactivity disorder)

डॉ. ईशा सिंह बताती हैं, ‘एडीएचडी एक डेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जो मुख्य रूप से बच्चों में देखा जाता है. यह दिमाग से जुड़ा विकार है. इसके कारण न सिर्फ बच्चे, बल्कि बड़े का भी ध्यान लगाना मुश्किल होता है. इस विकार से प्रभावित लोग बहुत ज्यादा सक्रिय रहते हैं या हर काम जल्दबाजी में करते हैं.

 प्रोफेशनल लाइफ प्रभावित हो सकती है (Professional Life)

बड़ों में एडीएचडी पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों तरह की लाइफ को प्रभावित कर सकता है. इसके कारण व्यक्ति एक स्थान पर टिककर लंबे समय तक बैठ नहीं पाता है. हर 10 मिनट में वह अपने स्थान से उठ जाता है. वह किसी भी टास्क को पूरा नहीं कर पाता है. काम में कई गलतियां दिख जा सकती हैं. यदि कोई व्यक्ति एडीएचडी से प्रभावित है, तो वह खुद बहुत ज्यादा बोलता है. सामने वाले व्यक्ति को कन्वर्सेशन करने नहीं देता है.

बड़ों में लक्षणों की कैसे पहचान हो सकती है (ADHD Symptoms)

डॉ. ईशा सिंह के अनुसार, ‘बड़ों में एडीएचडी की पहचान करना बच्चों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है. इसके लक्षण समय के साथ बदल सकते हैं. वे अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग रूप में प्रकट हो सकते हैं. सामान्य तौर पर बड़ों में इस विकार का निदान तब होता है जब उन्हें ध्यान केंद्रित करने, टाइम मैनेजमेंट, टीम के साथ मिलकर काम करने और काम को पूरा करने में कठिनाई महसूस होती है. काम में अनियमितता, बार-बार काम बदलना, ध्यान भटकना, भावनात्मक रूप से अस्थिर होना और लगातार तनाव में रहना जैसे लक्षण दिखने पर इसकी पहचान की जा सकती है. उनकी यह समस्या बचपन से लेकर बड़ी उम्र तक लगातार रह सकती है. प्रोफेशनल गाइडेंस और मनोवैज्ञानिक परीक्षणों के माध्यम से ही इसकी सही पहचान संभव हो सकती है.

एडीएचडी का इलाज कैसे किया जाता है (ADHD Treatment)

डॉ. ईशा सिंह के अनुसार, अटेंशन -डेफिसिट/हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर का कोई इलाज नहीं है. वर्तमान में उपलब्ध उपचार लक्षणों को कम कर सकते हैं. कामकाज में सुधार कर सकते हैं. उपचारों में दवा, मनोचिकित्सक, शिक्षा या प्रशिक्षण या उपचारों का संयोजन शामिल हो सकता है. थेरेपी (ADHD Therapy) से किसी भी एडल्ट की रोजमर्रा की जिंदगी को मैनेज किया जा सकता है.
एक पेशेवर परामर्शदाता या चिकित्सक पीड़ित वयस्क को यह सीखने में मदद कर सकता है कि वे अपने जीवन को कैसे व्यवस्थित करें, जैसे कि रूटीन बनाए रखना.

  • घर और ऑफिस के कार्यों और गतिविधियों के लिए अलग-अलग सूची बनाकर काम करना.
  • जरूरी कार्यों को शेड्यूल करने के लिए कैलेंडर का उपयोग करना.
  • याद रखने के लिए नोट्स और डायरी का उपयोग करना.
  • चाबियों, बिलों और कागजी कार्रवाई के लिए एक विशेष स्थान बना कर चलना.
  • बड़े कार्यों को मैनेज करने के लिए छोटे-छोटे स्टेप्स में तोड़कर काम करना, ताकि कार्य के प्रत्येक भाग को पूरा करने से उपलब्धि की भावना मिले।
  • दिमाग को स्थिर बनाये रखने और पेशेंस लूज नहीं करने के लिए ध्यान-योग और एक्सरसाइज का सहारा लेना।

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About the Author: स्मिता
स्मिता धर्म-अध्यात्म, संस्कृति-साहित्य, और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर शोधपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता में एक विशिष्ट नाम हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव समसामयिक और जटिल विषयों को सरल और नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने में उनकी दक्षता को उजागर करता है। धर्म और आध्यात्मिकता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और साहित्य के विविध पहलुओं को समझने और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में उन्होंने विशेषज्ञता हासिल की है। स्वास्थ्य, जीवनशैली, और समाज से जुड़े मुद्दों पर उनके लेख सटीक और उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं। उनकी लेखनी गहराई से शोध पर आधारित होती है और पाठकों से सहजता से जुड़ने का अनोखा कौशल रखती है।
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